Mrs India Contestant 2021 added a new official participant Dr Pratibha Singh from Mumbai
1.I consider my education as my foremost acheivement-
Double M.Sc. (ENVIRONMENTAL SCIENCES,BOTANY)
Ph.D
Double NET
B .Ed.
Awardee of CSIR - Senior Research Fellowship.
2.Author of Book "ENVIRONMENTAL STUDIES"for graduation level students.
3.Self written POETRY book going to get published soon.
4.Awarded with zonal and regional level certificates for supervising students in Science related projects.
5. I consider both of my daughters as my next Acheivement /asset of my life .
6.Inspite of fluctuations in life, like postings, kids, studies, job,relations etc, I could make balance between all these.
ज़िन्दगी
सावन की पहली बारिश, फागुन की खुली धूप ,
हरियाली सी सुन्दर , या भूकम्प सी कुरूप I
चिड़ियों का कलरव , बद्जुबां सी कोई गाली,
कभी दुःख की छाया,कभी उमंगें दुल्हन वाली I
मंदिर की बजती घंटी, या मस्जिद की अजान,
हर कदम एक जंग, हौंसलों की उड़ान I
तुझे कोई एक पहचान क्या दूँ?
ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ?..
यादों के गलियारे में , खुलता कोई झरोखा,
जीवन का यथार्थ या , उम्मीदों का धोखा I
खिड़की से झांकती , आशाओं की धुप ,
कभी गमगीन -कभी सलोना,तेरा रंग रूप I
तेरे हर पल को , मेहनत से संजोया है
बड़ी मशक्कत से इसे, इक लय में पिरोया है
तुही बता अब इसके दाम क्या दूँ?
ज़िन्दगी , मैं तुझे नाम क्या दूँ?..
आता और जाता ये , लोगों का मेला है,
भीड़ हर कहीं , पर हर कोई अकेला है,
सवालों और जवाबो का - उलझा सा फ़लसफ़ा
कभी तपती मरुस्थल , कभी कहकशां
मिलन का उल्लास ,कभी बिछुड़ने की उदासी
कभी झरने सी हंसी.. कभी- कभी रुआंसी
हंसी पे ही ठहर जाए,वो विराम क्या दूँ?
ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ?..
हर सांस से उम्मीद , हर रिश्ते में फ़रमाईश,
अज़ब सी कश्मकश, हर कदम पे आज़माईश
कभी खुद को गुलशन, कभी सहरा में पाया है
कभी लगे जिंदगी, एक ठहरा सा साया हैI
साँसों को जीने की एक छोटी सी कवायद लगे.
कभी इन सांसो से, खुद को ही शिकायत लगे,
सुकून से भरा कोई आराम क्या दूँ?..
ज़िन्दगी ,मैं तुझे नाम क्या दूँ?..
.महफ़िल में हँसे कभी, तन्हाई में रो लिए.
जिस राह ले चली ,हम उसी पे हो लिएI
कभी तुझमें दिखी मुझे , करीब की सहेली,
कभी बनी अनजान तू, अबूझ सी पहेली I
कभी फिसलती जिंदगी ,कभी सँवरती जिंदगी,
नन्हे नन्हे लम्हे इसके ,पलकों में पो लिए
सम्हाले जो लम्हों को,वो सामान क्या दूँ?,
ज़िन्दगी ,मैं तुझे नाम क्या दूँ?..
बच्चे की मुस्कराहट में, चूड़ी की खनखनाहट में,
कभी शांत समुन्दर ,कभी बादल की गड़गड़ाहट में,
कहीं दुःख की चादर , कहीं सुख की शहनाई,
उजियारा करते दिए कहीं ,बल्बों की जगमगाहट में
अतीत की जद्दोजहद, भविष्यों की योजना,
रोज सुबह उठके, वर्तमान को सींचना I
इक तेरी परिभाषा,तुझे परिमाण क्या दूँ?,
ज़िन्दगी ,मैं तुझे नाम क्या दूँ?
कभी शीशे सी साफ़, कभी लगे अस्पष्ट है
निरंतर सब दौड़ते , पर हर कोई अतृप्त हैI
कभी हंसती ,कभी रोती, कभी बड़ी, कभी छोटी,
गंगा सी पावन कभी ,कभी कीचड सी खोटी I
हर वक़्त हर हालात में, तुझे निहारते रहे,
कभी तनहा ,कभी संग ,तुझे संवारते रहे
इससे बड़ा अब कोई सम्मान क्या दूँ?
ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ..
जिंदगी तुझे काश , खुलकर जियूँ कभी,
तेरी हर बूँद को, खुल कर पियूं कभी I
बाहर से ख़ामोशी ,विचारों में अंतरदुन्द है,
कभी कसमसाहट ,कभी लगे स्वछंद है I
अनमोल है तू फिर भी,तेरी कीमत जानती हूँ,
खुदा का सुन्दर तोहफा, मैं ये भी मानती हूँ i
जिंदादिली को तेरी सलाम क्या दूँ?
ज़िन्दगी, मैं तुझे नाम क्या दूँ?.... मैं तुझे .नाम क्या दूँ?.....मैं तुझे नाम क्या दूँ….....
डा. प्रतिभा सिंह..
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