India Contestant 2021 added a new official participant LAXMI from Sawai Madhopur
1-शोषित ,पीड़ित एवं समाज से प्रताड़ित या शिक्षा के प्रति देहाती ग्रामीण बालिकाओं को जागरूक करना साथ ही मुख्य धारा में लाने का प्रयास ,बाल विवाह ,दहेज प्रथा ,पर्दा प्रथा ,मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को जड़ से दूर करने के लिए गांवों में जाकर जागरूक करना | 2-ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी रक्तदान के महत्व को बताकर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान करवाने के लिए जागरूक करना स्वयं में भी रक्तदान करती हूँ ,अभी अप्रेल माह में बाबा साहब की जयंती के अवसर पर विशाल समूह के साथ रक्तदान किया और करवाया | 3-महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति जिला सदस्य के नाते प्रत्येक दिन लोगों को जागरूक करना ,प्रकृति संरक्षण ,कोरोना महामारी के प्रभाव से लोगों को बचाने के लिए सोशियल मीडिया फेसबुक ,ट्विटर ,पेज ,वेबसाइट एवं छोटे छोटे कार्यक्रम के माध्यम से काम कर रहे है | ग्रामीण लोग सचेत भी हो रहे है ,अपने पड़ोसियों साथियों की सहायता भी कर रहे है | 4-में अखिल भारतीय सर्व धर्म महासभा की सवाई माधोपुर जिला अध्यक्षा के पद पर रहते हुए समरसता ,भाई चारा ,अमन चैन के लिए टीम के साथ काम कर रहे है ,स्वस्थ जीवन के लिए छोटे छोटे शारीरिक अभ्यास ,प्राथमिक उपचार जो आपातकालीन परिस्थिति में कारगर साबित हो सके इस प्रकार लगातार निस्वार्थ स्वयं के संसाधनों से कर रहे है | 5-आदिवासी परिवार में जन्म लेने के कारण मेरा स्वभाव प्रकृति के प्रति ज्यादा वफादार एवं लगाव है ,प्रकृति की सेवा ही मेरी सबसे बड़ी उपासना एवं शक्ति है ,हर वर्ष शहरों ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोंपन की मुहिम चलाते है ,गर्मी में बेजुबान पक्षियों के लिए जितना हम से हो सके परिण्डे लगाते है मेरे साथ मेरे बच्चे पूर्ण सहयोग करते है |इस कार्य के लिए मदर टेरसा फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया है ,कोरोना काल में किए गए कार्यों के लिए तो अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया है | "शीश कटे रुख बचे तो भी सस्तों जाण" सादर धन्यवाद | लक्ष्मी मीना (समाज सेविका) ग्राम -झोंपड़ा ,जिला सवाई माधोपुर https://www.facebook.com/lmeena63 https://twitter.com/laxmimeenaswm
कृषि ही मेरे जीवन का आधार है थोड़ी सी जमीन है उसी पर ही आश्रित हूँ ,मेरे पति शिक्षक है परंतु में कृषि को ही मेरा आधार मानकर काम करती हूँ | बुराइयों के खिलाफ मजबूती से संघर्ष #स्पर्श.... पुरूष का प्यार तब तक प्यार है, जब तक वो स्त्री को स्पर्श ना करले जबतक वो स्त्री स्पर्श को छू नहीं पाता उसके लिए वो सबकुछ होती है और जैसे ही स्त्री उसपर भरोसा करती है अपनी दुनिया समझने लगती है और सौप देती है सबकुछ अचानक से वो उसे घिनौनी लगती है ,चरित्र हीन लगने लगती है , क्यू उस स्त्री ने तो उसे भगवान माना है अच्छा बुरा कुछ सोचा ही नहीं लेकिन पुरूष तो प्यार करता ही नहीं था वो तो सिर्फ और सिर्फ उसके शरीर को पाना चाहता था उसके जज्बात उसका प्यार या उसका सम्मान उसके लिए सब एक दिखावा है वो बस यही तक आना चाहता है औरत के साथ अगर पुरूष इतना पवित्र है तो क्यूँ वो हर औरत को वासना की नजर से देखता है क्यू छूना चाहता है हर औरत को और जिन हाथों से वो किसी परायी औरत को छूता है फिर क्यूँ उन्ही हाथों से अपनी पत्नी को छूता है अगर एक पुरुष के छूने से एक औरत अपवित्र होती है तो उस औरत को छूकर पुरूष कैसे पवित्र रह जाता है उन्हीअपवित्र हाथों के छूने से उसकी बीवी उसकी बेटी कैसे पवित्र रह सकती हैं जो खेल वो घर से बाहर हर दूसरी औरतों के साथ खेलना चाहते हैं अगर वही खेल उनकी अपनी बीवी या बेटी के साथ कोई खेल रहा हो तो क्या वो उनको अपना पायेगा या फिर अपने आप को माफ कर पायेगा ?? जो मर्द ऐसे हैं मेने पोस्ट मे सिर्फ उनकी ही बात की है सब खुदपर ना लें ओर मेरी ये पोस्ट सही हे य़ा गलत सायद ये बात बहुत सी औरतें अच्छे से समझेंगी ज़िनके साथ ऐसा हुआ हे य़ा हो रहा हे बाकी किसी को कोई बात गलत लगे तो माफी... #महिलाओं...🙏
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